नया रायपुर को ग्रीन फील्ड के रूप में विकसित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। मास्टर प्लान में अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप नया रायपुर के कुल क्षेत्रफल का 20 से 40 फीसदी हिस्सा हरा भरा करने की सिफारिश की गई है। वहीं तीनों लेयर के लिए हरियाली का अलग-अलग मॉडल तैयार करने की सलाह है। इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि बॉटनिकल गार्डन को छोड़कर हरियाली बढ़ाने के लिए अलग-अलग जोन में स्थानीय प्रजाति के पौधों को प्राथमिकता से लगाने की सलाह दी गई है।

फैक्ट फाइल

– नया रायपुर का क्षेत्रफल- 8013 हेक्टेयर

– अंतरराष्ट्रीय मापदंड के हिसाब से हरियाली चााहिए – कुल क्षेत्रफल का 20 से 40 फीसदी

– इस हिसाब से हरियाली के लिए जमीन चाहिए- 1602 से 3205 हेक्टेयर

– बसने वाली आबादी- 5.60 लाख

– अंतरराष्ट्रीय मापदंड के हिसाब से हरियाली चााहिए – 25 से 100 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति

– इस हिसाब से हरियाली के लिए जमीन चाहिए – 1400 से 5600 हेक्टेयर

नया रायपुर के लिए मास्टर प्लान इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस, बेंगलुरू के विशेषज्ञों ने प्रो. एनएच रविंद्रनाथ के नेतृत्व में तैयार किया। 20 सदस्यीय टीम ने साल भर की मेहनत के बाद यह प्लान तैयार किया है। इस दौरान टीम के सदस्यों ने नया रायपुर के तीनों लेयर के लिए आवंटित की गई जमीन के लैंड यूज का अध्ययन किया। इस अध्ययन के बाद उन्होंने नया रायपुर में लेंडस्केपिंग का बेस लाइन तैयार किया। हरियाली की रणनीति तैयार करने के लिए स्थानीय और देश के नामचीन विशेषज्ञों से भी परामर्श किया गया। इसके बाद पूरे रायपुुर के तीनों लेयर के लिए अलग-अलग मॉडल विकसित किया गया। यहां की मिट्टी और पानी के स्थिति, टोपोग्राफी आदि का अध्ययन करने के बाद लगाए जाने वाले पौधों की प्रजातियों का चयन भी सावधानी से किया गया है।

तीन हिस्सों में रिपोर्ट

पूरी रिपोर्ट तीन हिस्से में तैयार की गई है। ग्रीनिंग स्ट्रेटजी एंड एप्रोच, ग्रीनिंग इंप्लीमेंटेशन मॉडल और बेसलाइन ऑफ नया रायपुर के नाम से तीन हिस्सों में पूरे शहर की हरियाली का खाका खींचा गया है। प्लान में बहुत से क्षेत्रों के लिए प्रजातियों की सिफारिश भी की गई है, वहीं कई क्षेत्रों में पौध रोपण से पहले ध्यान में रखने वाली जरूरी बातों का उल्लेख किया गया है।

अलग-अलग जोन में हो पौधरोपण

नया रायपुर को अलग-अलग जोनों में बांटकर पौध रोपण करने की सिफारिश की गई है। जोन के लिए मॉडल तैयार करते समय उस क्षेत्र विशेष की खासियत और जरूरत के हिसाब से पौधे की वैरायटी का चुनाव किया गया है। मसलन केपिटल कॉम्पलेक्स के सामने व आसपास लेंड स्केपिंग और ग्रीनरी में ज्यादातर सजावटी पौधे, कुछ विदेशी नस्लों सहित दूसरे राज्यों में उगने वालों पौधों के रोपण की वकालत है। सड़क के डिवाइडरों पर पांच से छह फुट तक बढ़ने वाले घनी झाड़ीनुमा पौधों की सिफारिश की गई है जो व्यूकटर का काम भी कर सकें।

50 से 60 फीसदी हों स्थानीय पौधे

विशेषज्ञों के दल ने यहां की जमीन और मिट्टी की प्रकृति का अध्ययन करने के बाद बॉटनीकल गार्डन को छोड़कर बाकी इलाकों में हर 50 से 60 फीसदी पौधे 10 प्रमुख स्थानीय प्रजातियों के लगाने की सिफारिश की है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर जोन या सब जोन के लिए पौधों का चयन करते समय दो सेट तैयार करना चाहिए। प्राइमरी सेट में छत्तीसगढ़ में उगने वाली 10 प्रमुख प्रजातियां शामिल हों। इनकी उपलब्धता की कमी या दूसरे कारणों को देखते हुए सेंकडरी सेट में ऐसे पौधे हों जो उनकी कमी को दूर करते हों। जोन विशेष के लिए पौधों का चयन उस प्रजाति की उपयोगिता, प्रजाति की मूल स्थान, सदाबहार, पेड़ का आकार एवं आकृति जोन की मिट्टी और बारिश के हिसाब से उपयुक्त है या नहीं, इस बात का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।

बॉटनीकल गार्डन में दुनिया भर के पौधे

विशेषज्ञों ने बॉटनीकल गार्डन में दुनिया भर से लाकर पौधे लगाने की सिफारिश की है। बॉटनीकल गार्डन बनाने के पीछे मकसद ही यही है कि यहां पौधों की प्रजातियों की विशाल रेंज तैयार की जाए जिसे देखने लोग दूर-दूर से आएं। इसमें छत्तीसगढ़ के जंगलों में पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी बूटी से लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में पाई जाने वाली पौधों की दुर्लभ प्रजातियों को लगाने की सिफारिश है।

छह फीट से बड़े पौधे

नया रायपुर में तेजी से हरियाली विकसित करने के लिए वन विभाग की ओर से छह फुट के पौधे लगाए जा रहे हैं। छह फिट तक बढ़ने के बाद पौधों के मरने की संभावना बहुत कम होती है। वहीं दो तीन वर्षों में ये खासे विकसित हो जाते हैं और हरियाली जल्द नजर आने लगती है।

इनका कहना है

नया रायपुर को हरित शहर के तौर पर विकसित करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस द्वारा तैयार मास्टर प्लान के हिसाब से पौधरोपण किया जा रहा है। अगले कुछ सालों में सुंदर और हरा-भरा शहर दिखने लगेगा। कम से कम पांच से छह फुट के पौधे लगाए जा रहे हैं। जिससे उसका बचे रहने और तेजी से बड़े होने की संभावना है।

– See more at: http://naidunia.jagran.com/chhattisgarh/raipur-master-plan-ready-for-naya-raipur-444878#sthash.2ZTIqgWl.dpuf