नई राजधानी के आठ सौ एकड़ में जंगल सफारी आकार लेने लगी है। सफारी कई मायनों में खूबियों वाली होगी। इसमें टाइगर, लायन और भालू को खुले में देखने का रोमांच मिलेगा। सफारी का जू यानी चिड़ियाघर भी अद्भुत होगा। यहां ओरंग उटांग यानी जंगल का आदमी, जिराफ, कंगारू, जेब्रा और चीते जैसे और भी कई ऐसे जानवर रहेंगे जो देश के जंगलों में पाए ही नहीं जाते। उन्हें कम लोगों ने ही देखा होगा।

सफारी को पूरी तरह से जंगल का लुक दिया जा रहा है। इसके चारों ओर की बाउंड्री वाल बनकर लगभग तैयार हो चुकी है। थोड़ा सा पैच बाकी है। लायन, टाइगर और भालू के साथ-साथ हिरणों और चीतल के बाड़े बनाने का काम चल रहा है। सफारी में टाइगर और लायन जैसे खूंखार जंगल की तरह खुले घुमेंगे और पर्यटक टफेंड ग्लास वाली बसों में बैठकर उन्हें देखेंगे। टफेंड ग्लास पत्थर फेंकने से भी नहीं टूटता। है और न जानवरों के पंजा मारने से। यानी पर्यटक पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे।
जू में 52 पिंजरे
जंगल सफारी में 50 एकड़ पर जू बनाया जा रहा है। जून में 52 पिंजरे होंगे। इन सभी में अलग-अलग जानवरों को रखा जाएगा। इनकी सूची बना ली गई है। आला अफसरों ने खुद ही इसके लिए जानवरों का चयन किया गया है।
औरंग उटांग आकर्षण
प्रजाति बंदरों की लेकिन इंसानों जैसी हरकतें करने वाला यह जानवर अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता है। थाइलैंड में इसके बाकायदा शो होते हैं। ये इंसानों जैसा करतब दिखाता है। इसे सफारी के जू का खास आकर्षण बताया जा रहा है।
लुप्त चीता भी देखिए
भारत के जंगलों से चीते का वजूद खतम हुए बरसों हो चुके हैं। इसे अंतिम बार बस्तर के जंगल में देखा गया था। अभी चीता केवल अफ्रीका में है। सेंट्रल जू अथॉरिटी के माध्यम से अफ्रीका से चीता मंगवाया जाएगा।
जिराफ पर होगी नजर
जिराफ अफ्रीका के मसाईमारा जंगलों में नजर आता है। इसे जंगल सफारी के जू में लाया जाएगा। इसके लिए पिंजरा तैयार किया जा रहा है।
अगले साल अगस्त तक
जंगल सफारी का काम तेजी से चल रहा है। इसी साल अगस्त से सफारी में जंगल जानवर नजर आने लगेंगे। उसी के मुताबिक काम चल रहा है।- डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री