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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर की भूमिका निभाने के लिए इंफोसिस, आईबीएम, विप्रो जैसी नामी कंपनियों ने रुचि दिखाई है। गुरुवार को सिस्टम इंटीग्रेशन फील्ड में विश्व स्तर पर काम कर रही 31 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपना प्रेजन्टेशन नया रायपुर विकास प्राधिकरण के अफसरों के सामने में दिया। इस दौरान उन्होंने सिस्टम इंटीग्रेट करने के लिए उनकी कंपनी द्वारा इस्तेमाल की जा रही लेटेस्ट तकनीक, सर्विसेस आदि का ब्योरा देकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। एक कंपनी के प्रतिनिधि को 20 मिनट से आधे घंटे तक का समय दिया गया। इन कंपनियों का प्रेजन्टेशन देर रात तक चलता रहा। इंटेलिजेंट सिस्टम वाला देश का पहला शहर बनेगा नया रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नया रायपुर की हर सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज, ट्रांसपोर्ट से लेकर तमाम सभी सेवाओं के लिए इंटेलिजेंट सिस्टम डिवेलप करने वाला पहला शहर होगा। एनआरडीए के सीईओ अमित कटारिया ने बताया कि देश में स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट आठ महीने पहले आया है, लेकिन उनकी टीम इस पर पिछले दो साल से काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। एनआरडीए के अफसरों की मानें तो नया रायपुर देश में पहला पूरी तरह से विकसित स्मार्ट सिटी होगा। वर्कशॉप एक दिन और बढ़ीस्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में दर्जनभर कंपनियों ने और रुचि दिखाई है। इसके चलते वर्कशॉप और प्रेजन्टेशन एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। पिछले दो दिनों रजिस्टर्ड हुई कंपनियों को शुक्रवार को अपना प्रेजन्टेशन दिखाने का मौका दिया जाएगा। तीन दिनों के मंथन के बाद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को कैसे धरातल पर उतारना है, इसका खाका तैयार किया जाएगा। इन मामलों पर दिया प्रेजन्टेशन – लैंड मैनेजमेंट – सिटी सर्विलेंस सिस्टम- युटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम और स्काडा- इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम- सिटी गाइड मैप जो वेब ब्राउजर पर उपलब्ध हो- शहर में टच स्क्रीन- वाई-फाई शहर स्तर पर – शहर में कहां-कहां डिस्प्ले बोर्ड, लगें जो समय और अलग-अलग सेवाओं की जानकारी दें – इंटेलिजेंट लाइटिंग सिस्टम- बारिश के पानी का इंटेलिजेंट ड्रेनेज सिस्टम – इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन .

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रायपुर देश का पहला स्मार्ट सिटी बनेगा। इसके लिए गुरुवार को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह स्मार्ट सिटी नया रायपुर, रायपुर और बीच के एरिया को विकसित कर बनाया जाएगा। नया रायपुर रायपुर से दक्षिण पूर्व दिशा में करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसे पहले ही स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। 8,000 हेक्टेयर एरिया में फैले इस शहर में विश्व स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, विश्वस्तरीय शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन के इंतजाम हो रहे हैं। लेकिन रायपुर और नया रायपुर के बीच एक लंबा गैप है। इस हिस्से को भी स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया है। कैसी होगी स्मार्ट सिटी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करते वक्त यहां के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सड़कें और बेसिक इंफ्रा डेवलप किया जाएगा। यह स्मार्ट सिटी विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगी। बीच के हिस्से में अंडरग्राउंड केबल, ड्रेनेज और वाटर सिस्टम के साथ जगह-जगह वाइफाई जोन विकसित किए जाएंगे। स्मार्ट सिटी को बसाने की जिम्मेदारी नया रायपुर विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है। स्मार्ट सिटी बसाने पर शुरुआती लागत 1,500 करोड़ रुपए से लेकर 2,000 करोड़ रुपए आने की संभावना बताई जा रही है। इस स्मार्ट सिटी में एक दशक के भीतर करीब 4.5 लाख लोगों के बसने का अनुमान है।कमल विहार भी शामिल होगा स्मार्ट सिटी में स्मार्ट सिटी के तहत अब पुराने और नए रायपुर सहित बीच के हिस्से में स्मार्ट सिटी की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। पुराने और नए रायपुर के बीच का गैप भरने के लिए हाल में कमल विहार की नई योजना लाई गई है। यह कमल विहार भी स्मार्ट सिटी से कनेक्ट हो जाएगा। दोनों कमल विहार का इंफ्रा स्मार्ट सिटी के तर्ज पर डेवलप हो रहा है। इनके स्मार्ट सिटी का हिस्सा बनने पर नई राजधानी की पुराने शहर से दूरी भी कम होगी। स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चयनित क्षेत्र में फोरलेन सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। सड़कों के किनारे कई तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी।केंद्र से मिला पूर्ण सहयोग का आश्वासन शहरी विकास एवं आवास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी विकसित करने में हरसंभव वित्तीय मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। यह स्मार्ट सिटी देश में अन्य शहरों के लिए मॉडल साबित होगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर नया रायपुर को उन 100 शहरों की सूची में शामिल करने की गुजारिश की थी। क्या है स्मार्ट सिटी ?शहरों के विकास में स्मार्ट सिटी कान्सेप्ट का अर्थ है अत्याधुनिक इंफ्रा स्ट्रक्चर के साथ बौद्धिक और सामाजिक सहूलियतों के इंतजाम के प्राकृतिक संसाधनों का कुशलता से प्रबंधन कर एक उच्च स्तर की लाइफ स्टाइल वाला शहर डेवलप करना। अभी तक शहर में अच्छी सड़कें, गगनचुंबी इमारतें, चमचमाती गाड़ियां, सजे-धजे होटल, रेस्त्रा और व्यापारिक प्रतिष्ठान आते थे। लेकिन स्मार्ट सिटी में इंटलेक्चुअल और सोशल पहलुओं को जोड़कर हाईक्लास फैसलिटी डेवलप की जा रही है। आपका भवन आपके घर की बिजली आन-आफ करता हो, गाड़ियां खुद अपनी पार्किंग ढूंढ लें, स्टीट लाइट स्वचालित रूप से आन और आफ हों । – नया रायपुर और रायपुर के बीच के हिस्से को मिलाकर स्मार्ट सिटी डेवलप किया जाएगा। केंद्र सरकार ने हमारे प्रेजेंटेशन को सराहा और भरपूर मदद देने का आश्वासन दिया है। नया रायपुर पहले ही इसी तर्ज पर डेवलप हो रहा है, अब संपूर्ण रायपुर इसमें शामिल होगा।अमित कटारिया, सीईओ, एनआरडीए .

Central Park (7) - Copy

 

नया रायपुर में सेंट्रल पार्क 32 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। 70 एकड़ पार्क की लैंड स्केपिंग और कुछ अन्य निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं। यह राशि मुख्य रूप से उद्यान की लैेंड स्केपिंग सहित बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हो रही है। इसके बाद लगभग इतनी ही राशि दूसरे फेज में खर्च करने की तैयारी है।

सेंट्रल पार्क को जीएमआर चौक के दोनों तरफ उत्तर और दक्षिण हिस्से में बांटकर विकसित किया जा रहा है। प्रत्येक हिस्सा 35 एकड़ का है। दोनों हिस्सों में आम लोगों की सुविधा के हिसाब से बस पार्किंग, कार पार्किंग, टैक्सी स्टैंड, स्कूटर पार्किंग, रेस्टॉरेंट, फूड स्टॉल, टॉयलेट आदि का इंतजाम किया जाएगा।

इमर्सिव डोम पर 7 करोड़

इमर्सिव डोम पर सात करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। जर्मन तकनीक से बने इस अधलेटे अवस्था में डोम पर करीब आधे घंटे की मूवी या डॉक्यूमेंट्री दिखाने का इंतजाम किया गया है। 150 लोगों के एक साथ बैठने की व्यवस्था की गई है। तकनीक से लेकर सारा सामान जर्मन से मंगाया गया है।

ट्रैफिक पार्क

उत्तरी हिस्से में आम नागरिकों और बच्चों को ट्रैफिक नियमों से परिचित कराने केलिए ट्रैफिक पार्क तैयार किया जा रहा है। इस पार्क में ट्रैफिक नियमों को चित्रित किया जाएगा। पार्क बनकर तैयार होगा तो यहां लोग घूमने के साथ ट्रैफिक के मामले में शिक्षित भी होंगे।

बच्चों के लिए खासा खर्च

पार्क में बच्चों के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पार्क के उत्तरी हिस्से में स्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है। इसके दोनों तरफ सांप-सीढ़ी और चेस का प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है। जिस पर आदमकद गोटियां और रखी जाएंगी, जिसे सरका कर बच्चे खेल सकेंगे। वहीं बड़े बच्चों का पार्क डिवेलप किया जा रहा है, जिसमें झूला के अलावा विभिन्न प्रकार की खेल सामग्रियां रहेंगी।

दक्षिण हिस्से में एम्फीथिएटर

पार्क के दक्षिण हिस्से में एम्फीथिएटर विकसित किया जा रहा है। इस थिएटर में 1500 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। थिएटर का इस्तेमाल नाटक आदि के अलावा विविध आयोजनों के लिए किया जा सकेगा।

जोडियक पार्क पर करोड़ों खर्च

पार्क के दक्षिणी हिस्से में जोडियक पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें राशि के हिसाब से विभिन्न मुद्राएं निर्मित की गई हैं। इस उद्यान पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रह-मंडल का विकास किया जा रहा है, जो तारामंडल की तर्ज पर होगा।

बुजुर्गों के लिए हट्स

उद्यान के दक्षिणी हिस्से में सीनियर सिटीजन हट्स यानी बुजुर्गों के लिए झोपड़ीनुमा संरचना तैयार की जा रही है, जिसमें उनके बैठने और लेटकर आराम करने की व्यवस्था होगी। इसी से लगा एक योगा पार्क भी होगा।

रंगीन मछलियों का तालाब

रंगीन मछलियों का एक छोटा तालाब विकसित किया जाएगा, जिसमें दुनियाभर की रंग-बिरंगी मछलियों को पाला जाएगा। अफसरों का कहना है कि यह पूरे प्रदेश के लिए कौतुहल का विषय बनेगा।

फुलवारी यानी गार्डन आफ फ्रेगरेंस

सेंट्रल पार्क के उत्तरी और दक्षिणी दोनों हिस्सों में दो फुलवारियां विकसित की जाएंगी, जिसे गार्डन ऑफ फ्रेगरेंस नाम दिया गया है। इन पार्क में खुशबूदार फूल के पौधे लगाए जाएंगे।

सितंबर में खत्म हो जाना था काम

सेंट्रल पार्क के निर्माण की जिम्मेदारी उल्लास नगर ठाणे की फर्म ईगल इंफ्रा लिमिटेड को दिया गया है। 11 सितंबर 2012 में कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। दो साल के लिए जारी वर्क ऑर्डर में उद्यान का काम 11 सितंबर 2014 को खत्म हो जाना था, लेकिन अभी तक आधा काम भी नहीं हो पाया है। काम में हो रही देरी के बावजूद एनआरडीए ने फर्म पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

- गार्डन का विकास नया रायपुर के निर्माण का एक हिस्सा है। निर्माण योजनाबद्ध तरीके से हो रहा है। अभी सेक्टर 27 पूरी तरह आबाद हो गया है। सेक्टर 29 में भी कर्मचारी आ रहे हैं। जल्द ही अफसरों की शिफ्टिंग शुरू होगी तब तक यह गार्डन भी बनकर तैयार हो जाएगा। निर्माण में हो रही देरी के लिए टेंडर में दिए गए प्रावधानों के हिसाब से ठेका लेने वाली कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी