इमर्सिव डोम में मूवी का हिस्सा बनेंगे दर्शक:

देश का पहला इमर्सिव डोम नया रायपुर में बनकर तैयार हो गया है। डोम की छत पर 15 से 30 मिनट की मूवी दिखाई जाएगी, जिसे देखने पर यह अहसास होगा कि दर्शक उस मूवी के हिस्सा हैं। डोम बनकर तैयार हो चुका है, पूूरी तरह कंप्यूटर से संचालित इस तकनीक की टेस्टिंग हो रही है। टेस्टिंग पूरी होने के साथ बाहरी सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है, जिसमें करीब छह महीने लगेंगे। इसके बाद डोम आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इमर्सिव डोम बनाने का काम जर्मनी से संबद्ध बेंगलुरू की कंपनी टेंजिबल एक्सपेरिएंसेस को दिया गया था। कंपनी प्रबंधन ने इसे तैयार करने के लिए उपकरण और एक्सपर्ट जर्मनी से बुलवाए थे। विशेषज्ञों की देखरेख में तैयार डोम का काम तकनीकी काम पूरा हो चुका है। इसकी टेस्टिंग की जा रही है। छह प्रोजेक्टर का होता है इस्तेमालआमतौर पर सिनेमा में मूवी दिखाने के लिए जहां केवल एक प्रोजेक्टर का उपयोग होता है, वहीं इमर्सिव डोम में छह से 12 प्रोजेक्टरों का इस्तेमाल कर इसे रियल बनाने की कोशिश की जाती है। डोम की छत पर विशेष मटेरियल से बने पर्दे पर जो मूवी दिखाई देती है, वह इन प्रोजेक्टरों के मिले-जुले (ब्लेंडेड) तस्वीरों का परिणाम होती है।शूटिंग के लिए अलग तरह का कैमरा इमर्सिव डोम के लिए फिल्म बनाने के लिए अलग तरह का सेटअप और कैमरे का इस्तेमाल होता है। सामान्य कैमरा किसी सीन का अधिकतम 180 डिग्री तक का हिस्सा कवर कर पाता है, जबकि इसकी मूवी किसी सीन का 360 डिग्री हिस्सा कवर करती है, जिसे फिश आई तकनीक कहा जाता है। कई तकनीक का मिण हैडोम डेवलप करने वाली कंपनी के विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक फिल्म निर्माण की कई तकनीक का मिण है। इसमें जीवंत तस्वीरों के साथ प्लैनेटोरियम इफेक्ट और कुछ कंप्यूटर एनिमेशन भी होता है। छह प्रोजेक्टरों में अलग-अलग तरह के सीन मिलकर एक सीन तैयार करते हैं, जो दर्शक के चारों ओर दिखता है। इसी वजह से अहसास होता है कि दर्शक उस मूवी का हिस्सा है। बैठने की व्यवस्था भी खासबैठने के लिए कुर्सियों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इसमें दर्शक आराम से आधे लेटे हुए अवस्था में आ जाता है। सभी कुर्सियों को डोम की एक खास दिशा की ओर सेट किया जाता है। डोम के भीतर लगी किसी भी कुर्सी में बैठने पर प्रत्येक दर्शक को एक जैसा सीन और इफेक्ट का अहसास होता है।90 के दशक में डेवलप की गई तकनीक1990 के बाद आई यह तकनीक दुनिया में सबसे ज्यादा जर्मनी में पापुलर हुई। डोम के लिए मूवी बनाना भी आम मूवी से कई गुना अधिक खर्चीला होता है। यही वजह है कि यह तकनीक थिएटर की तरह पापुलर नहीं हो पाई। डोम के चारों ओर झील-सा नजारा डोम के चारों ओर झील-जैसा नजारा तैयार किया जा रहा है। इस पर काम शुरू हो चुका है। सिविल वर्क पूरा होने के बाद यह डोम पानी से घिरा हुआ नजर आएगा। दर्शक झील से नजारे के बीच से गुजरकर डोम तक पहुंचेंगे। – डोम का निर्माण हो चुका है। डोम के चारों ओर छोटे-छोटे तालाब तैयार किए जा रहे हैं, जिनके सौंदर्यीकरण के बाद इस डोम तक जाना और अंदर बैठक मूवी देखना लोगों को बहुत पसंद आएगा। इस काम में अभी छह महीने और लगेंगे।